Thursday, February 19, 2026
हेमंत -मोहन का निगम मंडल प्लान,कल दिल्ली में सीएम करेंगे बड़ा ऐलान!
मुस्लिम विधायक को मिला शंकराचार्य का समर्थन, आतिफ अकील की जबरदस्त अपील
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक द्वारा गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने संबंधी अशासकीय संकल्प लाए जाने के बाद इस मुद्दे ने सियासी और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य ने इस संकल्प का समर्थन करते हुए कहा कि सभी विधायकों को आगे आकर इसे पारित कराने में सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि यह संकल्प पास नहीं होता है तो यह हिंदुओं के लिए कलंक होगा।
शंकराचार्य ने कहा कि आश्चर्य की बात है कि जिनसे अपेक्षा होती है वे कई बार पीछे हट जाते हैं, जबकि जिनसे अपेक्षा नहीं होती वे आगे आकर साथ खड़े हो जाते हैं। उन्होंने विधायक आतिफ अकील के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि स्वयं को हिंदू कहने वाले विधायकों को यह पहल करनी चाहिए थी।
आतिफ अकील ने अपने संकल्प में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के साथ ही मृत्यु के बाद गो माता के सम्मानजनक अंतिम संस्कार की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सभी विधायकों से अपील की कि वे इस संकल्प को पारित कर इस कार्य में सहभागी बनें। उन्होंने आतिफ अकील को इस पहल के लिए बधाई भी दी।
सीएम मोहन यादव ने सदन में क्यों मांगी माफी ,,बार बार क्यों झुंझला रहे कैलाश !
चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सिंगरौली में आदिवासियों की ज़मीन उद्योगपति गौतम अडानी को देने के मुद्दे पर सरकार को घेर रहे थे। जैसे ही “अडानी” नाम बार-बार गूंजा, सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। अध्यक्ष ने भी सदन में मौजूद नहीं किसी व्यक्ति का नाम लेने पर आपत्ति जता दी।
इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नेता प्रतिपक्ष को नसीहत दे डाली। बस फिर क्या था—सियासी पारा उबल पड़ा। विपक्ष ने इसे असंसदीय शब्द बताते हुए कड़ा विरोध किया और मंत्री से माफी की मांग पर अड़ गया। जवाब में नेता प्रतिपक्ष ने भी तीखे शब्दों में पलटवार किया।
सदन का माहौल ऐसा बना कि राज्यपाल के अभिभाषण की चर्चा शोर में दब गई। आधे घंटे में तीन बार कार्यवाही स्थगित हुई और पूरे दिन में कुल सात बार सदन की कार्यवाही रोकनी पड़ी। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह आदिवासी समाज का अपमान है, जबकि सत्ता पक्ष इसे बयान की गलत व्याख्या बता रहा है।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि अभिभाषण पर बहस कम और विवादित शब्द पर बहस ज़्यादा होती रही। जनता उम्मीद कर रही थी कि विकास, बजट और नीतियों पर सार्थक चर्चा होगी, लेकिन चौथे दिन की कार्यवाही शब्दों की तल्खी और आरोप-प्रत्यारोप के नाम रही।
अब देखना यह है कि अगली बैठक में चर्चा पटरी पर लौटती है या फिर सदन में सियासी तापमान यूं ही उबलता रहेगा।
हालांकि मामले का पटापेक्ष तब हो गया जब सीएम मोहन यादव ने ही बड़ा दिल दिखाते हुए माफी मांगी,, जिसके बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी |“कार से उतरिए, ज़मीन पर आइए” — चौपाल में जनता का ‘ग्राउंड रियलिटी चेक’
इंदौर। इंदौर को लंबे समय से साफ-सफाई और बेहतर शहर प्रबंधन के लिए सराहा जाता है। लेकिन लोगों का कहना है कि सड़कों की बार-बार खुदाई और अधूरे कामों पर भी उतनी ही गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।
जमीन पर आइए महापौर जी
वार्ड 84 की जनता चौपाल में विकास के मुद्दों पर चर्चा चल रही थी, तभी एक महिला ने सीधे महापौर पुष्यमित्र भार्गव से सवाल कर दिया। उन्होंने कहा, “कार से उतरकर लोगों के बीच चलिए, तब समझ आएगा कि सड़कें बनती कम और खुदती ज्यादा क्यों हैं।”
स्वच्छता के बाद खुदाई में नं. वन
महिला ने तंज करते हुए कहा, “शहर सफाई में नंबर वन है, लेकिन क्या खुदाई में भी रिकॉर्ड बनाना है?” उन्होंने नगर निगम की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए पूछा कि जब पैसा कम है तो बार-बार खुदाई पर खर्च क्यों हो रहा है।
तालियों से गूंज उठी चौपाल
उनकी बात पर चौपाल में तालियां गूंज उठीं। कुछ लोग मुस्कुराए, तो कुछ ने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया। मंच पर मौजूद अधिकारियों ने भी अपने जवाब देने की तैयारी की।
खुलकर हुई चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया कि अब लोग सिर्फ सुनने नहीं, बल्कि सवाल पूछने भी आ रहे हैं। चौपाल में इस बार विकास के दावों से ज्यादा, ज़मीन से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई।
Wednesday, February 18, 2026
एमपी बजट: कर्ज की मजबूरी बनी घोषणाओं की दूरी!
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए विकास और सामाजिक योजनाओं पर बड़ा दांव लगाया है। राज्य के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने विधानसभा में बजट प्रस्तुत किया, जिसमें महिलाओं, किसानों, शिक्षा, स्वास्थ्य और शहरी विकास को प्राथमिकता दी गई है। खास बात यह रही कि इस बार भी सरकार ने कोई नया कर नहीं लगाया।
बजट का आकार और विजन
सरकार ने लगभग 4.38 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया है। इसे विकास उन्मुख और दीर्घकालिक रणनीति वाला बजट बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे “समावेशी विकास की दिशा में ठोस कदम” बताया। सरकार का लक्ष्य राज्य की अर्थव्यवस्था को आने वाले वर्षों में तेजी से आगे बढ़ाना है।
महिलाओं के लिए बड़ा प्रावधान
महिला सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए लाड़ली बहना योजना के लिए भारी बजटीय प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे लाखों महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
किसानों को राहत और ऊर्जा पर जोर
कृषि क्षेत्र के लिए विशेष पैकेज घोषित किया गया है। सिंचाई, सोलर पंप और कृषि अधोसंरचना पर निवेश बढ़ाया जाएगा। सरकार ने इसे “किसान कल्याण वर्ष” की दिशा में कदम बताया है।
शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश
स्कूल शिक्षा को मजबूत करने के लिए नए शिक्षकों की भर्ती का ऐलान किया गया है। साथ ही, सरकारी स्कूलों में बच्चों को पोषण कार्यक्रम के तहत दूध उपलब्ध कराने की योजना है। स्वास्थ्य क्षेत्र में नए अस्पतालों और मेडिकल सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया गया है।
शहरी विकास और रोजगार
बजट में मेट्रो विस्तार, ई-बस सेवा और आवास योजनाओं के लिए भी पर्याप्त धन का प्रावधान किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और बुनियादी ढांचा मजबूत होगा।
मध्यप्रदेश का यह बजट सामाजिक सुरक्षा और विकास परियोजनाओं के संतुलन के रूप में देखा जा रहा है। बिना नए कर लगाए बड़े खर्च का प्रावधान सरकार के लिए चुनौती भी रहेगा। अब निगाह इस बात पर होगी कि घोषणाओं को जमीन पर कितनी तेजी से लागू किया जाता है।





