Wednesday, February 4, 2026
मोहन यादव का दिल्ली दौरा, इस बार लिस्ट होगी फाइनल
रात के ढाई बजे थाने में घुसे बीजेपी विधायक, पुलिसकर्मियों की उड़ी नींद, VIDEO हुआ वायरल!
विदिशा। मध्यप्रदेश में जनता की सुरक्षा करने वाले पुलिसकर्मी गहरी नींद में सो रही है, ये हम नहीं सिरोंज से बीजेपी के विधायक उमाकांत शर्मा का कहना है। दरअसल, मंगलवार रात करीब ढाई बजे क्षेत्र के विधायक उमाकांत शर्मा आंनदपुर ईलाके में पहुंचे थे। तभी विधायक शर्मा औचक निरीक्षण के लिए थाने पहुंचे। यहां पहुंचने के बाद विधायक जी नजारा देखकर दंग रह गए। थाने का चैनल गेट खुला हुआ था, कमरों के दरवाजे खुले हुए थे, कुर्सियां खाली और बेंच पर सोता जवान मिला। ये न तो सिपाही था न ही आरक्षक, ये जवान था होमगॉर्ड का सिपाही जिसके भरोसे पूरा थाना और शहर छोड़ रखा था।
10 से 15 मिनट घूमने के बाद इस लापरवाही को देखते हुए, गहरी नींद में सो रहे सिपाही को विधायक ने खुद जगाया और पूछताछ की। इसी बीच, थाना प्रभारी अनुज प्रताप सिंह को विधायक के निरीक्षण की जानकारी मिली और वे भी आनन-फानन में थाने पहुंचे। थाना प्रभारी अनुज प्रताप सिंह ने सफाई देते हुए बताया कि थाने में कुल 20 पुलिसकर्मी पदस्थ हैं, जिनमें 3 महिला आरक्षक भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वे थाने के पास बने क्वार्टर में थे और क्षेत्र में पुलिस गश्त जारी थी। विधायक ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर कोई गलत इरादे वाला व्यक्ति आता, तो थाने से सामान तक ले जा सकता था।
विधायक ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट पर वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा कि "आज मैंने रात्रि 2.30 से 3.00 बजे तक आनंदपुर गांव के थाने की रात्रि गश्त एवं चौकीदारी व्यवस्था को देखा। व्यवस्था पूर्णतः खराब है। मैं थानेदार साहब , SDOP साहब, SP महोदय से आवेदन करता हूं आनंदपुर में रात्रि गश्त की व्यवस्था बहुत खराब है। वहां के व्यापारीगण कई बार गश्त सुधारने हेतु आग्रह कर चुके है। मैंने भी थानेदार महोदय अनुज प्रताप सिंह आनंदपुर थाना , SDOP महोदय विकासखंड लटेरी तथा SP महोदय को अवगत कराया है। इसके बाद भी व्यवस्था नहीं सुधारना बिल्कुल गलत है। जनता के हित में सुधार हेतु आवश्यक कार्यवाही करें।"
हालांकि, विधायक के निरीक्षण में सामने आई स्थिति ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही इस दौरान आंनदपुर में अगर कोई अनहोनी या दुर्घटना हो जाती तो पुलिस गहरी नींद में सोती ही रहती। या फिर थाने से ही कई महत्वपूर्ण दस्तावेज या सामान चोरी हो जाता तो उसका जिम्मेदार कौन होता। यही सोता हुआ सिस्टम जनता की परेशानियां बढ़ाता है। यहीं वजह है कि इंसाफ के लिए आम जनता को इतना परेशान होना पड़ता है। अब देखना होगा कि वीडियो वायरल होने के बाद व्यवस्थाएं सुधरेंगी या फिर किसी बड़ी अनहोनी होने का इंतजार किया जाएगा।
गेहूं का पैसा चाहिए? तो 7 फरवरी से पहले जरूर सुधार लें ये गलती
भोपाल। मध्यप्रदेश में रबी सीजन के तहत समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी के लिए किसानों का पंजीयन 7 फरवरी 2026 से शुरू होगा, जो 7 मार्च 2026 तक चलेगा। राज्य आपूर्ति निगम के नियमों के अनुसार, पंजीयन के समय किसान के आधार कार्ड और खसरा (भूमि रिकॉर्ड) में नाम और उसकी स्पेलिंग बिल्कुल एक जैसी होना जरूरी है। अगर नाम में कोई अंतर है, तो किसान को पहले तहसील कार्यालय से सत्यापन कराना होगा।
जांच के लिए डाले जाएंगे ₹1
खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के निर्देश पर इस बार पंजीयन के दौरान ही किसानों के आधार से जुड़े बैंक खाते में 1-1 रुपये भेजकर वेरिफिकेशन किया जाएगा। इसका मकसद यह है कि बाद में गेहूं का भुगतान करते समय कोई तकनीकी समस्या न आए।
किसानों की सुविधा के लिए पंजीयन दो श्रेणियों में किया जाएगा
मुफ्त पंजीयन केंद्र:
- ग्राम पंचायत
- जनपद पंचायत
- तहसील कार्यालय
- सहकारी समिति
शुल्क वाले केंद्र:
- MP ऑनलाइन कियोस्क
- CSC सेंटर
- लोक सेवा केंद्र
- साइबर कैफे
यहां अधिकतम ₹50 शुल्क लिया जाएगा।
गेहूं का MSP बढ़ा
इस बार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 160 रुपये ज्यादा है। पूरे प्रदेश में 3186 खरीदी केंद्र बनाए गए हैं।
इन खातों में नहीं होगा भुगतान
गेहूं की राशि सीधे किसान के आधार-लिंक बैंक खाते में दी जाएगी।
इन खातों में भुगतान नहीं होगा—
- संयुक्त खाता
- निष्क्रिय खाता
- फिनो, एयरटेल, पेटीएम जैसे पेमेंट बैंक खाते
अगर आधार से मोबाइल नंबर या बैंक खाता लिंक नहीं है, तो किसान समय रहते आधार केंद्र, बैंक या पोस्ट ऑफिस में अपडेट करा लें।
पंजीयन के लिए जरूरी दस्तावेज
- मूल आधार कार्ड (आधार से मोबाइल नंबर लिंक होना जरूरी)
- वोटर आईडी या अन्य पहचान पत्र
- खसरा-खतौनी / भूमि रिकॉर्ड
- सिकमी या बटाईदार किसानों के लिए अनुबंध पत्र
- वन पट्टाधारी किसानों के लिए पट्टे का प्रमाण
- बैंक पासबुक (नाम और IFSC कोड साफ दिखना चाहिए)
Tuesday, February 3, 2026
मोहन-शिवराज की मुलाकात,, क्या बनेगी बात
किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, मोहन कैबिनेट में हुआ बड़ा फैसला, मिलने जा रही ये सौगात
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मना रही है। इसी कड़ी में किसानों के हित में आज मोहन कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। जिससे प्रदेश के किसानों के चेहरे खिल उठें है। प्रदेश सरकार ने भावांतर योजना को पूरी तरह से लागू करने के निर्देश दिए है। इस योजना के तहत प्रदेश सरकार 2 महीने के अंदर तत्काल भुगतान करने की भी बात कही गई है।
7 लाख से ज्यादा किसानों को हुआ भुगतान
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप ने देते हुए बताया कि सरकार की भावांतर योजना के तहत करीब 7 लाख किसानों को 15 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। यह भुगतान किसानों को दो महीने के भीतर किया गया है। मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने भावांतर योजना को पूर्णता लागू किया। प्रदेश सरकार द्वारा भावांतर योजना का भुगतान तत्काल 2 माह के अंदर किया गया।
भावांतर भुगतान योजना क्या है?
मध्यप्रदेश में भावांतर भुगतान योजना का मुख्य लाभ ऐसे किसानों को दिया जाता है जो सोयाबीन या अन्य फसलों की कीमत मंडी में न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम हो जाती है, तो सरकार MSP और विक्रय मूल्य के अंतर की राशि को सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा करती है। इससे किसानों को फसल बेचने पर उचित मूल्य सुनिश्चित होता है और उन्हें घाटे से सुरक्षा मिलती है, जिससे उनकी आय में स्थिरता आती है।
प्रदेश को मिली ये सौगात
कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप ने जानकारी देते हुए आगे बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 29 जनवरी को महाकाल लोक की तर्ज पर पशुपतिनाथ लोक का लोकार्पण किया गया। प्रदेश ने पहली बार भोपाल में 30 जनवरी को पुष्प महोत्सव आयोजित किया। यह केवल फूलों की प्रदर्शनी नहीं बल्कि फूलों के माध्यम से मध्य प्रदेश के किसानों की आमदनी बढाने का एक उत्सव था।
बैठक में लिए गए ये फैसले
सरदार सरोवर परियोजना से विस्थापित आदिवासी बंधुओं के 25,602 परिवारों को पूर्व में आवासीय पट्टे प्रदान किए गए थे, जिनकी रजिस्ट्री नहीं हो सकी थी। अब सरकार द्वारा इन सभी आवासों की रजिस्ट्री निःशुल्क कराने का निर्णय लिया गया है। कैबिनेट में 2 सिंचाई परियोजनाओं (धनवाही और बरही) को स्वीकृति दी गई है। वर्ष 2026-27 से लेकर 2030-31तक के लिए कई विभागों की विभिन्न योजनाओं की निरंतरता का निर्णय लिया गया। राज्य समाज कल्याण बोर्ड के कर्मचारियों को महिला एवं बाल विकास में विलय करने की स्वीकृति मिली।
केंद्रीय बजट में MP की बल्ले-बल्ले, CM यादव ने बताया खास, जानें प्रदेश को क्या-क्या मिला...
भोपाल। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी रविवार को यूनियन बजट 2026-27 पेश किया। जिसके बाद बजट को लेकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस की। इस पीसी में सीएम डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इसको दूरदर्शी और सभी वर्गों के लिए उपयोगी बताया।
बजट में भविष्य की तैयारी
सीएम ने जानकारी देते हुए बताया कि मध्य प्रदेश में बेरोजगारी की दर घटकर डेढ़ प्रतिशत तक रह गई है और तेजी से इसमें सुधार हो रहा है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय बजट पर कहा है कि मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार का बजट एक आत्मा से तालमेल करते हुए चल रहा है। बजट में निवेशकों के विश्वास को कायम रखने का काम किया गया है। केंद्रीय बजट सिर्फ कागजीकरण नहीं है बल्कि भविष्य को लेकर तैयार किया गया प्लान है।
यूनियन बजट में मध्यप्रदेश को क्या मिला?
मुख्यमंत्री ने यूनियन बजट का उल्लेख करते हुए कहा कि बजट में मध्यप्रदेश को 15 हजार करोड़ की रेल योजनाएं मिली है। हेल्थ टूरिज्म के क्षेत्र में प्रदेश को और काम करने का और मौका मिलेगा। मुख्यमंत्री ने केंद्रित बजट को पर्यटन के लिहाज से प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण बताया। जिससे भोपाल, जबलपुर, इंदौर जैसे शहरों के लिए अब और ज्यादा पैसा मिलेगा।
विकसित भारत की दिशा तय करेगा बजट
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने बजट को लेकर कहा कि केंद्रीय बजट आने वाले 10 वर्षों में भारत के विकास की दिशा तय करेगा। जिन क्षेत्रों में दुनिया के केवल दो-तीन देशों का दबदबा है, उन रणनीतिक उत्पादों के निर्माण पर बजट में विशेष ध्यान दिया गया है। बजट में पहली बार अलग माल गाड़ी कॉरिडोर बनाने की बात की गई है, जिससे लॉजिस्टिक्स खर्च कम होगा और व्यापार बढ़ेगा।
एमपी का घटा बजट!
केंद्र के बजट को लेकर पूरे देश में बीजेपी बड़े चेहरों के सहारे बजट की विशेषताएं बता रही है, इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बजट की विशेषताएं बताई जरूर,लेकिन मध्य प्रदेश के लिए मिलने वाली राशियों में हुई कटौती सरकार के लिए चुनौती जरूर रहेगी।





