Tuesday, February 17, 2026

मप्र में मुख्य बजट से पहले 19 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट पेश


भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए अनुपूरक बजट पेश किया। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने सदन में 19 हजार 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का अनुपूरक बजट रखा।

सरकार ने बताया कि यह अतिरिक्त बजट अलग-अलग विभागों की बढ़ी हुई जरूरतों को पूरा करने के लिए लाया गया है। इसमें विकास कार्य, सड़क-पुल, सामाजिक योजनाएं और अन्य जरूरी खर्च शामिल हैं।

बजट पेश होते ही विपक्ष ने कुछ मुद्दों पर सवाल भी उठाए। इस अनुपूरक बजट पर 23 फरवरी को सदन में विस्तार से चर्चा होगी। चर्चा के बाद इसे मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया जाएगा।

अनुपूरक बजट तब लाया जाता है जब साल के बीच में पहले से तय बजट से ज्यादा पैसे की जरूरत पड़ती है। अब सबकी नजर 23 फरवरी की चर्चा पर रहेगी।

एमपी विधानसभा की दूसरे दिन की कार्रवाई में जमकर हंगामा

एमपी विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन की शुरुआत हंगामेदार रही,, कांग्रेस विधायक खराब पानी की बोतल लेकर प्रदर्शन करते नजर आए, नेता प्रतिपक्ष की अगुवाई में विधायकों ने कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग की मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विपक्ष के हंगामे और इंदौर दूषित पानी से मौतों के मामले में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफा की मांग पर भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा ने कहा कि कांग्रेस को पहले अपने इतिहास पर नजर डालनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अर्जुन सिंह के कार्यकाल में हुए गैस कांड में हजारों लोगों की जान गई थी, तब किसने इस्तीफा दिया था इसी तरह दिग्विजय सिंह के शासनकाल में किसानों की हत्या के मामलों में किसने जिम्मेदारी ली थीभाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज नैतिकता की बात कर रही है, जबकि उसके अपने शासनकाल में गंभीर घटनाएं हुईं, लेकिन किसी ने जवाबदेही तय नहीं की।उमाकांत शर्मा ने कांग्रेस के अंदरूनी हालात पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी में नेतृत्व को लेकर भ्रम की स्थिति है। उन्होंने दावा किया कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बीच खींचतान चल रही है, वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को भी पूरी स्वीकार्यता नहीं मिल रही है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता एक-दूसरे का कुर्ता फाड़ने में लगे हैं और जनता के मुद्दों से भटकाने के लिए विधानसभा में हंगामा कर रहे हैं। भाजपा विधायक ने दावा किया कि प्रदेश की जनता कांग्रेस की आंतरिक कलह को देख रही है और समय आने पर जवाब देगी। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान इंदौर की घटना को लेकर पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने सरकार पर तीखा हमला बोला जयवर्धन सिंह ने कहा कि इंदौर की इस घटना से सिर्फ इंदौर ही नहीं बल्कि पूरा मध्य प्रदेश कलंकित हुआ है। उन्होंने कहा कि एक ओर इंदौर देश की सबसे साफ-सुथरी नगरी के रूप में पहचाना जाता है लेकिन इस घटना ने पूरे देश में शहर की छवि को धूमिल किया है। पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि इंदौर नगर निगम में अधिकांश ठेके भाजपा पार्षदों से जुड़े लोगों को दिए जा रहे हैं समय पर पानी की पाइपलाइन नहीं डाली गई जिससे यह गंभीर स्थिति बनी।उन्होंने सवाल उठाया कि इस पूरे मामले में वरिष्ठ भाजपा नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की क्या जिम्मेदारी बनती है। उन्होंने कहा कि इस घटना के नैतिक आधार पर महापौर, एमआईसी सदस्य और मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस पर निशाना साधा है।शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने इंदौर की घटना को गंभीरता से लेते हुए स्वयं कई बार दौरे किए हैं और संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि नगर पालिका नगर निगम और पंचायत स्तर तक स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि आम नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए और समय-समय पर पानी की गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित की जाए।उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी लापरवाही करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर निलंबन से लेकर सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई भी की जा सकती है। वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पानी जैसे गंभीर मुद्दे पर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।कांग्रेस पर हमला बोलते हुए शर्मा ने कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वह केवल विधानसभा में हंगामा कर रहा है। कांग्रेस के पास कोई काम है नहीं अभी यहां हंगामा कर रहे है विधानसभा से फ्री होने के बाद कांग्रेसी जीतू पटवारी और उमंग सिंघार से इस्तीफा की मांग करेंगे। - मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विपक्ष ने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल से हुई मौतों के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। इस संबंध में नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष से चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव स्वीकार करने की मांग की है।नेता प्रतिपक्ष का आरोप है कि इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में लोगों को मल-मूत्र से दूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिसके कारण कई लोगों की मौत हो चुकी है और अनेक लोग बीमार हैं। उन्होंने कहा कि यह गंभीर जनस्वास्थ्य का मामला है और सरकार को इस पर तुरंत जवाब देना चाहिए।उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार इस मुद्दे पर सदन में चर्चा से क्यों बच रही है। पार्टी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाती रहेगी। कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने और गाय की मौत होने पर उसका विधिवत अंतिम संस्कार किए जाने की मांग की है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि गाय को लेकर चिंता जताना अच्छी बात है लेकिन सिर्फ बयान देने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि आतिफ अकील और सभी मुस्लिम समाज के लोगों को मस्जिदों में जाकर अपील करनी चाहिए कि किसी भी कीमत पर गाय की हत्या न होने दी जाए।रामेश्वर शर्मा ने आगे कहा कि गाय को काटने वाला कसाई कौन है इस पर भी स्पष्ट बात होनी चाहिएसमाज के बीच जाकर जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। कुत्तों की नसबंदी को लेकर भी सत्तापक्ष और विपक्ष में जमकर नोंकझोंक हुई!

Monday, February 16, 2026

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का विपक्ष पर निशाना

भोपाल - सीएम डॉ.मोहन यादव ने विपक्ष परा निशाना साधा है सीएम ने कहा है कि बड़े नादान है वो कांग्रेसी ये कांग्रेसी समझने में गलती करते हैं,कांग्रेस इसी कारण से अपनी विश्वसनीयता खो रही है..बजट का अभिभाषण सरकार का आईना होता है..आगे जाकर के पूरे सदन में इस पर चर्चा होती है..चर्चा में भाग ले अच्छी बात है तो सरकार की प्रशंसा करे..विपक्ष में हो तो सरकार की कमजोरी बताओ..मर्यादा के पार जाकर के राज्यपाल के अभिभाषण का विरोध करते है तो अच्छी बात नहीं है.. नाच न जाने आंगन टेडा जैसे हालत है कांग्रेस के ,,सीएम ने कहा जनता कांग्रेस की बात नहीं मान रही है.. सीएम ने आश्वस्त किया कि कल से सकारात्मक रूप से सदन में इस पर चर्चा होगी..सरकार सभी बातों का जवाब देने के लिए तैयार है..

सदन में सीधा टकराव: मौतों पर चुप्पी क्यों? मंत्रियों को हटाओ, श्वेत पत्र लाओ


भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र पहले ही दिन सियासी संग्राम में बदल गया। राज्यपाल मंगूभाई पटेल के अभिभाषण के दौरान कांग्रेस विधायकों ने जोरदार हंगामा किया और इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों का मुद्दा उठाया। विपक्ष का आरोप था कि इतने गंभीर मामले को भाषण में जगह तक नहीं दी गई।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में सरकार की उपलब्धियों, निवेश, कृषि वर्ष 2026 और 2047 तक 2 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य जैसे दावों का जिक्र किया। लेकिन विपक्ष का कहना था कि जमीनी हकीकत और भाषण के दावों में बड़ा अंतर है।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नल-जल योजना और दूषित पानी से हुई मौतों को सरकार की नाकामी बताते हुए कर्ज पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग दोहराई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सरकार को सीधे कठघरे में खड़ा किया। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

तीन मंत्रियों की बर्खास्तगी की मांग, विपक्ष ने खोला मोर्चा

कांग्रेस ने साफ कहा है कि हाल की घटनाओं और विवादित बयानों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। विपक्ष ने तीन मंत्रियों की बर्खास्तगी की मांग करते हुए सरकार पर नैतिक जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। कांग्रेस का कहना है कि जब तक कार्रवाई नहीं होती, सदन से सड़क तक आंदोलन जारी रहेगा।

वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष के प्रदर्शन को राजनीतिक ड्रामा करार दिया है। लेकिन साफ है कि बजट सत्र की शुरुआत ही टकराव और तीखे हमलों के साथ हो चुकी है।

बाल-बाल बचे मुख्यमंत्री! टेकऑफ के दौरान हुआ ऐसा कि थम गईं सांसें



खंडवा। खंडवा जिले के पंधाना में मुख्यमंत्री मोहन यादव का हेलीकॉप्टर टेकऑफ के दौरान कुछ सेकंड के लिए लड़खड़ा गया। हेलीकॉप्टर आगे बढ़ने के बजाय हल्का पीछे की ओर गया और कुछ पल हवा में ठहर सा गया। करीब 36 सेकंड तक मौके पर मौजूद लोगों की सांसें थमी रहीं।

मुख्यमंत्री राज्य स्तरीय कार्यक्रम के बाद भोपाल लौट रहे थे। टेकऑफ के दौरान उठी धूल और दिशा बदलने की प्रक्रिया में यह स्थिति बनी। हालांकि पायलट ने तुरंत नियंत्रण संभाल लिया और हेलीकॉप्टर सुरक्षित रूप से उड़ान भर गया।

खंडवा के एसपी मनोज कुमार राय के अनुसार इसमें कोई तकनीकी खराबी नहीं थी। उनके मुताबिक टेकऑफ के समय दिशा समायोजन और धूल कम करने के लिए स्पीड धीमी की गई थी। कुछ पलों के सस्पेंस के बाद उड़ान सामान्य हो गई और मुख्यमंत्री सुरक्षित भोपाल पहुंच गए।



बजट सत्र की शुरुआत, कर्ज पर श्वेत पत्र की मांग से सियासत गर्म


भोपाल। मध्य प्रदेश का विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो गया है। राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने औपचारिक भाषण दे दिया, अब असली मुकाबला 18 फरवरी को होगा, जब वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा 4.8 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश करेंगे। आंकड़ा बड़ा है, लेकिन जनता के हिस्से क्या आएगा—यह हर साल की तरह बड़ा सवाल है।

इस बार विपक्ष खाली हाथ नहीं आया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने साफ कहा है—सरकार कर्ज पर कर्ज ले रही है, तो जनता को हिसाब भी देना होगा। श्वेत पत्र की मांग दरअसल उस खाते की पड़ताल है, जिसमें उधार तो बढ़ता जा रहा है, लेकिन विकास का बैलेंस उतना साफ नजर नहीं आता।

सिंघार ने याद दिलाया कि किसान आयात नीति से परेशान हैं, युवा आत्मनिर्भरता के वादों का इंतजार कर रहे हैं, महिलाएं सुरक्षा को लेकर सवाल पूछ रही हैं, दूषित पानी से मौतें हो रही हैं और गर्मी से पहले ही जल संकट दस्तक दे रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि बजट में राहत की बारिश होगी या फिर आंकड़ों की आतिशबाज़ी?

अब देखना दिलचस्प होगा कि 4.8 लाख करोड़ के इस बजट में आम जनता को कितनी राहत मिलती है और विपक्ष के सवालों का जवाब सरकार कितनी मजबूती से दे पाती है। फिलहाल बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही सियासी तापमान बढ़ना तय माना जा रहा है।